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जिस देश के लोगो में खुद को
पिछड़ा सिद्ध करने की होड़ लगी हो,
वो देश आगे कैसे बढ़ेगा ?

Jis Desh Ke Logo Main Khud Ko
Pichda Siddh Karne Ki Hod Lagi Ho,
Wo Desh Aage Kaise Badhega??

दुनियां मेहनत करती है, Forward होने के लिये!
भारत में लोग मर रहे है, Backward होने के लिए!

Duniya Mehnat Karti Hai, Forward Hone Ke Liye!
Bharat Main Log Mar Rahe Hai, Backward Hone Ke Liye!!

गरीबी…
जाति देखकर नहीं आती
फिर आरक्षण…
जाति के आधार पर क्यों?

Gareebi Jati Dekhkar Nahi Aati
Phir Aarakshan Jaati Ke Aadhar Par Kyun??

आओ मिलकर आग लगाएं,नित नित नूतन स्वांग करें,
पौरुष की नीलामी कर दें,आरक्षण की मांग करें,

पहले से हम बंटे हुए हैं,और अधिक बंट जाएँ हम,
100 करोड़ हिन्दू है,मिलकर इक दूजे को खाएं हम,

हमने कलम किताब लगन को दूर बहुत ही फेंका है,
नाकारों को खीर खिलाना संविधान का ठेका है,

मैं भी पिछड़ा,मैं भी पिछड़ा,कह कर बनो भिखारी जी,
ठाकुर पंडित बनिया सब के सब कर लो तैयारी जी,

जब पटेल के कुनबों की थाली खाली हो सकती है,
कई राजपूतों के घर भी कंगाली हो सकती है,

देश मरे भूखा चाहे पर अपना पेट भराओ जी,
शर्माओ मत,भारत माँ के बाल नोचने आओ जी,

दुनियां मेहनत करती है, Forward होने के लिये!
भारत में लोग मर रहे है, Backward होने के लिए!

जिस देश के लोगो में खुद को
पिछड़ा सिद्ध करने की होड़ लगी हो,
वो देश आगे कैसे बढ़ेगा ?

गरीबी…
जाति देखकर नहीं आती
फिर आरक्षण…
जाति के आधार पर क्यों?

तेरा हिस्सा मेरा हिस्सा,किस्सा बहुत पुराना है,
हिस्से की रस्साकसियों में भूल नही ये जाना है,

याद करो ज़मीन के हिस्सों पर जब हम टकराते थे,
गज़नी कासिम बाबर मौका पाते ही घुस आते थे

मैं पटेल हूँ मैं गुर्जर हूँ,लड़ते रहिये शानों से,
फिर से तुम जूते खाओगे गजनी की संतानो से,

ऐसे ही हिन्दू समाज के कतरे कतरे कर डालो,
संविधान को छलनी कर के,गोबर इसमें भर डालो,

राम राम करते इक दिन तुम अस्सलाम हो जाओगे,
बंटने पर ही अड़े रहे तो फिर गुलाम हो जाओगे,

परिक्षा मे आगे वाले के भरोसे मत बैठिये,
क्या पता आगे वाला अनामत के भरोसे बैठा हो…

अब हम लड़ने आये हैं आरक्षण वाली रोटी पर,
जैसे कुत्ते झगड़ रहे हों कटी गाय की बोटी पर,

आरक्षण विरोधी शायरी इन हिंदी
अगर घोड़ा गधे से तेज दोड सकता है तो क्या घोड़े के पैर मे आरक्षण कि जंजीर बांध दे ??
जिससे गधा आगे निकल जाये….
तेज चलना घोड़े कि प्रतिभा है कमजोरी नहि….!
अगर 40% नंबर पाने वाला पुलिस_अधिकारी बन जाता है,
और80% नंबर पाने वाला रोजगार न मिलने के कारण चोर बन जाता है,\

बनिए का बेटा रिक्शे की मज़दूरी कर सकता है,
और किसी वामन का बेटा भूखा भी मर सकता है,

आओ इन्ही बहानों को लेकर,सड़कों पर टूट पड़ो,
अपनी अपनी बिरादरी का झंडा लेकर छूट पड़ो,

शर्म करो,हिन्दू बनते हो,नस्लें तुम पर थूंकेंगी,
बंटे हुए हो जाति पंथ में,ये ज्वालायें फूकेंगी,

“करती हूं अनुरोध आज मैं , भारत की सरकार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से
“वर्ना रेल पटरियों पर जो , फैला आज तमाशा है ,”

आरक्षण हटाओ भारत बचाओ
जाट आन्दोलन से फैली , चारो ओर निराशा है
“अगला कदम पंजाबी बैठेंगे , महाविकट हडताल पर ,”
“महाराष्ट में प्रबल मराठा , चढ़ जाएंगे भाल पर
“राजपूत भी मचल उठेंगे , भुजबल के हथियार से ,”

“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से
“निर्धन ब्राम्हण वंश एक , दिन परशुराम बन जाएगा ,”
“अपने ही घर के दीपक से , अपना घर जल जाएगा
“भडक उठा गृह युध्द अगर , भूकम्प भयानक आएगा

आरक्षण वादी नेताओं का , सर्वस्व मिटाके जायेगा
“अभी सम्भल जाओ मित्रों , इस स्वार्थ भरे व्यापार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से
“जातिवाद की नही , समस्या मात्र गरीबी वाद है ,”

“जो सवर्ण है पर गरीब है , उनका क्या अपराध है
“कुचले दबे लोग जिनके , घर मे न चूल्हा जलता है ,”
“भूखा बच्चा जिस कुटिया में , लोरी खाकर पलता है

“समय आ गया है उनका , उत्थान कीजिये प्यार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से
“जाति गरीबी की कोई भी , नही मित्रवर होती है ,”
“वह अधिकारी है जिसके घर , भूखी मुनिया सोती है

“भूखे माता-पिता , दवाई बिना तडपते रहते है ,”
“जातिवाद के कारण , कितने लोग वेदना सहते है………”
“उन्हे न वंचित करो मित्र , संरक्षण के अधिकार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से………”

बारिश में भी “आरक्षण” होना चाहिए।
जनरल के घर 9 इंच,
OBC के घर 18 इंच,
SC ST के यहाँ 36 इंच,
नेता के घर बादल फट जाये!!

आरक्षण से बने डाक्टर ने खुद के बारे मे कहा…
हमारी शख्शियत का अंदाज़ा तुम क्या लगाओगे ग़ालिब,,
जब गुज़रते है क़ब्रिस्तान सेतो मुर्दे भी उठ के पूछ लेते हैं…
कि डाॅक्टर साहब !! अब तो बता दो मुझे तकलीफ क्या थी…!!

जितनी मेहनत जाट आंदोलन तोड फोड़ और रेल की पटरियो को
उखाड़ने मे कर रहे है अगर इतनी ही मेहनत वो पढने मे कर ले तो
आरक्षण की जरुरत ही ना पड़े!!

मैं सामान्य श्रेणी का दलित हूँ साहब मुझे आरक्षण चाहिए।
तेजाब की फैक्टरी में काम करते हुए खुद को जला कर मुझे पाला,
आज उस पिता की बीमारी के इलाज के लिए धन चाहिए,
मैं सामान्य श्रेणी का दलित हूँ साहब मुझे आरक्षण चाहिए।

कमजोर हो रही हैं निगाहें माँ की मुझे आगे बढ़ता देखने की चाह में,
उसकी उम्मीदों को पूरा कर सकूँ उसे मेरा जीवन रोशन चाहिए,
मैं सामान्य श्रेणी का दलित हूँ साहब मुझे आरक्षण चाहिए।

आधी नींद में बचपन से भटक रहा हूँ किराये के घरों में,
चैन की नींद आ जाये मुझे रहने को अपना मकान चाहिए,
मैं सामान्य श्रेणी का दलित हूँ साहब मुझे आरक्षण चाहिए।

भाई मजदूरी कर पढ़ाई करता है थकावट से चूर होकर,
मजबूरियों को भुला उसे सिर्फ पढ़ने में लगन चाहिए,
मैं सामान्य श्रेणी का दलित हूँ साहब मुझे आरक्षण चाहिए।

http://www.whatsappshayari.com

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