घड़ी की टिक टिक को मामूली न समझो दोस्तों,
बस यूँ समझ लीजिये की ज़िन्दगी के पेड़ पर कुल्हाड़ी के वार है…!!
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तारीखों में कुछ ऐसे भी मंजर हमने देखे है,
कि लम्हों ने खता की थी, और सदियों ने सजा पाई।
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सीने से लगा के सुन तो सही वो धड़कन,
जो हर पल तुझसे मिलने की ज़िद करती है…!!
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रहने दे कुछ बातें यूँ ही अनकही सी,
कुछ जवाब तेरी आँखों में देखे हैं अटके हुए…!!
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मंजिल तो हांसिल कर ही लेंगे कहीं किसी रोज,
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा के मर जायेंगे…!!http://www.whatsappshayari.com

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