हर रात यही सोचते सोचते सुबह हो जाती है….!

मोहब्बत सजा है, मजा है या गुनाह है….!!

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चलो अच्छा हुआ तूझे पहचान गए तन्हाई में,

महफिल की बात होती तो किस-किस को जवाब देते.!!

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तुझे कद्र नहीं..मुझे फिक्र है..

लापरवाहियां तेरी..मुझे बेपरवाह न कर दें..!!

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रख लो दिल में संभाल

कर थोड़ी सी यादें हमारी…

रह जाओगे जब तन्हा…

बहुत काम आयेंगे हम…!”

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इंसान की समझ बस इतनी है।

जब उसे जानवर कहा जाये तो वो नाराज़ हो जाता है।

और जब उसे शेर कहा जाये तो खुश हो जाता है।

हालाँकि शेर भी जानवर ही होता है।

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