नाराज़ ना होना कभी यह सोचकर,
काम मेरा और नाम किसी और का..
यहाँ सदियों से जलता तो “घी” और “बाती” है,
पर लोग कहते हैं कि ‘दीपक’ जल रहा है…!!
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मेरा टूटना, बिखरना, पत्थर बनना, महज एक इत्तेफाक नही..
बहुत मेहनत की हैं, एक शक्स ने इसकी खातिर…!!
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मेरे होंठों पे आज भी, कायम है तेरी खुशबू,
इनपे भला शराब का, अब असर कहाँ होगा…!!
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हाथ पर हाथ रखा उसने तो मालूम हुआ,
अनकही बात को किस तरह सुना जाता है…!!
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खाली पड़ा है कुछ दिन से घर के पास का मैदान…
कोई मोबाइल बच्चो की गेंद चुरा ले गया…!!http://www.whatsappshayari.com

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