खता उसकी भी नही यारो वो भी क्या करती,
हजारो चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करती…!!

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हमने सिर्फ अपने आंसूऒ की वजह लिखी है,
पता नहीं लोग क्यों कहते है.. वाह क्या शायरी लिखी है…!!

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पहचान से मिला काम बहुत कम समय तक टिकता है,
लेकिन
‘काम’ से मिली पहचान उम्र भर कायम रहती है..!!

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जहाँ तू और मैं हिन्दू मुसलमाँ के ‘फर्क’ में मर जाते है,
वहाँ कुछ लोग हम दोनों की खातिर ‘बर्फ’ में मर जाते है…!!

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रुकावटे  तो  ज़िन्दा  इन्सान  के  लिए  हैं,
मय्यत  के  लिए  तो  सब  रास्ता  छोड़  देते  हैं…!!http://www.whatsappshayari.com

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