एक कड़वा सच
पूरा देश बेटी बचाने निकला हैं,
बस शर्त सिर्फ इतनी सी हैं,
कि वो पैदा  दुसरो के घर हो…!!
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“खुश-नसीब” वो नहीं जिसका नसीब अच्छा है
बल्कि, खुश-नसीब वो है,
जो अपने नसीब से खुश है…!!
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कभी जो थक जाओ तुम दुनिया की महफ़िलों से तो,
मुझे आवाज़ दे देना हम आज भी अकेले रहते हैं…!!
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लोग जब अनपढ थे,तो परिवार एक हुआ करते थे,
अक्सर मैने टूटे परिवारों मे पढे लिखे लोग ही  देखे हैं…!!
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आज वक़्त खराब हैँ इसलिये चुप हैँ,
जब दिमाग खराब होगा तब हिसाब पल पल का होगा…!!http://www.whatsappshayari.com

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