समझ में नहीं आता, वफा करें तो किससे करें,

मिट्टी से बने लोग, काग़ज़ के टुकडों पे बिक जाते हैं…!!
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कैसे करुं भरोसा गैरों के प्यार पर,
अपने ही मजा लेते हैं अपनों की हार पर…!!
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इतने बुरे तो न थे जितने इलज़ाम लगाये लोगो ने,
कुछ मुक्क़दर बुरे थे कुछ आग लगाई लोगों ने…!!
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नफरतों के बाजार में जीने का अलग ही मजा है,
लोग रुलाना नही छोड़ते ,और हम हँसना नही छोड़ते…!!
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इतना ‪रूठना‬ आता है,
तो कभी ‪प्यार‬ से मना भी ‪लिया‬ करो तुम…!!http://www.whatsappshayari.com

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